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Tuesday, October 31, 2017

राजकुमार सिंह।



Image Courtesy : Google Images


[ Editor's Feed: Mr. Rajkumar Singh, DGM, BHEL , a person of unmatched energy, his hard work and sincerity  towards his profession is something which is enviable and respect worthy, I know him quite closely, and I feel proud to say that "ALEEK PATA" got successful in inspiring him to express his WORLD OF FEELINGS. Every word of this poem is genuine and heartfelt.
ALEEK PATA is grateful to him, we wish long lasting association with him. ]


एक साँस में भाग कर हम पेड़ों पर चड़ जाया करते थे,
एक साँस में दूध का गिलास भी ख़त्म कर जाया करते थे,
छोटी सी चीज पाने को भी यारों हम अड़ जाया करते थे,
वो भी क्या दिन थे यारों जब हम स्कूल जाया करते थे।

सर्दी हो या बरसात , मैदान में जरूर जाया करते थे,
पिता की सीख, माँ का दुलार और वह दोस्तों का प्यार
रह रह कर आज भी याद आ जाता है यार....

आज एक मंजिल की सीडीयाँ चढने में पसीना आ जाता है,
शुगर,बी पी के मारे हर पकवान देख मन ललचाता है,
नोकरी और घर की कश्मकश के बीच मन ठगा सा रह जाता है।


मन, कर्म और बचन के बीच शायद सामंजस्य बिठा पाऊँ मैं,
बचपन की उस मस्ती को शायद ही कभी भुला पाऊँ मैं।।





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